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Meer aa ke laut gaya 1

Munnawar Rana

Onverkort 9789353813055
1 dag 2 uur 52 minuten
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Van de uitgever

यह पुस्तक कद्दावर अदीब और शायर मुनव्वर राणा की आपबीती है। इसमें जितनी आपबीती है उतनी ही जगबीती भी है। एक आईने की शक्ल में लिखी गयी इस किताब में लिखने वाले का अक्स तो दिखता ही है,ख़ुद उस आईने का अक्स भी दिखता है जिसके ढांचे के भीतर यह किताब लिखी गयी है। 'मीर आ के लौट गया' गुज़िशता यादों की तस्वीरों से सजी हुई एक अलबम है। इस किताब की भाषा में गजब की रवानगी है जो सीधे उर्दू से हिन्दी में ढलकर आई है।
Van de uitgever
यह पुस्तक कद्दावर अदीब और शायर मुनव्वर राणा की आपबीती है। इसमें जितनी आपबीती है उतनी ही जगबीती भी है। एक आईने की शक्ल में लिखी गयी इस किताब में लिखने वाले का अक्स तो दिखता ही है,ख़ुद उस आईने का अक्स भी दिखता है जिसके ढांचे के भीतर यह किताब लिखी गयी है। 'मीर आ के लौट गया' गुज़िशता यादों की तस्वीरों से सजी हुई एक अलबम है। इस किताब की भाषा में गजब की रवानगी है जो सीधे उर्दू से हिन्दी में ढलकर आई है।
Publicatiedatum
11-01-2020

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