Cover

Kore Kaghaz

Amrita Pritam

Onverkort 9789353814625
4 uur 45 minuten
Sommige artikelen bevatten affiliate links (gemarkeerd met een sterretje *). Als je op deze links klikt en producten koopt, ontvangen we een kleine commissie zonder extra kosten voor jou. Uw steun helpt ons deze site draaiende te houden en nuttige inhoud te blijven maken. Hartelijk dank voor uw steun!

Van de uitgever

एक युवा मन में कितनी कातरता, कितनी बेचैनी उभरकर आयी है, इसका अनुमान आप उपन्यास प्रारम्भ करते ही लगा लेंगे। चौबीस वर्षीय पंकज को जब यह पता चलता है कि उसकी माँ उसकी माँ नहीं है, तब अपने असली माँ- बाप को जानने की तड़प उसे दीवानगी की हदों तक ले जाती है। ये क़िताब इस बात का पुख़्ता सबूत है कि मशहूर लेखिका अमृता प्रीतम के लेखन में न सिर्फ़ भावनात्मक गहराई थी बल्कि शब्द-शिल्प का अपार कौशल भी था. इसे ऑडियोबुक बनाने के लिए आवाज़ दी है भावना पंकज जी ने। उनके वाचन ने इस क़िताब को वो रंग दिया है, जिसमें अपने शब्दों को भीगा देख कर अमृता जी बेहद ख़ुश होतीं।तो अब 'कोरे काग़ज़'आप सुनने वालों के हवाले!
Van de uitgever
एक युवा मन में कितनी कातरता, कितनी बेचैनी उभरकर आयी है, इसका अनुमान आप उपन्यास प्रारम्भ करते ही लगा लेंगे। चौबीस वर्षीय पंकज को जब यह पता चलता है कि उसकी माँ उसकी माँ नहीं है, तब अपने असली माँ- बाप को जानने की तड़प उसे दीवानगी की हदों तक ले जाती है। ये क़िताब इस बात का पुख़्ता सबूत है कि मशहूर लेखिका अमृता प्रीतम के लेखन में न सिर्फ़ भावनात्मक गहराई थी बल्कि शब्द-शिल्प का अपार कौशल भी था. इसे ऑडियोबुक बनाने के लिए आवाज़ दी है भावना पंकज जी ने। उनके वाचन ने इस क़िताब को वो रंग दिया है, जिसमें अपने शब्दों को भीगा देख कर अमृता जी बेहद ख़ुश होतीं।तो अब 'कोरे काग़ज़'आप सुनने वालों के हवाले!
Publicatiedatum
26-05-2021

Storyside IN