Kaalo Thiyu Sai : Pagal hue ho?
Kishore Choudhary
Onverkort
•
9789354345913
4 uur 42 minuten
Sommige artikelen bevatten affiliate links (gemarkeerd met een sterretje *). Als je op deze links klikt en producten koopt, ontvangen we een kleine commissie zonder extra kosten voor jou. Uw steun helpt ons deze site draaiende te houden en nuttige inhoud te blijven maken. Hartelijk dank voor uw steun!
Van de uitgever
जीवन के बिंबों से भरी संजीदा कहानियों और चुटकी भर शब्दों की तड़प भरी बेवजह की बातों से इतर यात्रा, संस्मरण और गप से बने लोकजीवन के रेखाचित्र। मौखी नंबर आठ, नरगासर, मुड़दा कोटड़ी, रेलवे मैदान, पनघट रोड, भड़भूँजे की भाड़, मोहन जी का सिनेमा, चाय की थड़ी, दल्लुजी कचौड़ी वालों की दुकान, फ़कीरों का कुआँ, स, लुहारों का वास जैसे बेहिसाब ठिकाने, जिनसे मिलकर अलसाए, ऊँघे बाड़मेर की जो सूरत बनती है, वही सब ये किताब है। कहानी नहीं है किंतु कहानी ही है। कि इस किताब में रेगिस्तान के छोटे से क़स्बे बाड़मेर से की गई दूर-नज़दीक की यात्राओँ, बिछड़े दोस्त की याद, बड़ी हस्तियों से की गई बेआवाज़ बातचीत, भांग और विज्ञान के अद्भुत मेल से बनी गप और वह सब, जो आधे जगे, आधे खोए रचे गए।ये ख़ास किताब पहली बार ऑडियो में उपलब्ध है।